वरिष्ठ पत्रकार और सोशल वर्कर तीस्ता सीतलवाड़ को गुजरात पुलिस ने मुंबई से किया गिरफ्तार;

 विडंबना देखिए दंगा करने वाले आज सत्ता के शीर्ष पर बैठे हुए हैं और दंगा पीड़ितों को राहत पहुंचाने वाली समाजसेविका आज जेल के पीछे हैं। शायद इसी को घोर कलयुग कहते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार और सोशल वर्कर तीस्ता सीतलवाड़ को गुजरात पुलिस ने मुंबई से किया गिरफ्तार;


तीस्ता सीतलवाड़ हुई गिरफ्तार

देश की जानी-मानी पत्रकार और समाज सेविका तीस्ता सीतलवाड़ को कौन नहीं जानता। जिन्होंने सत्तामद के अहंकार में डूबी हुई उस वक्त कि गुजरात प्रशासन को हिला कर रख दिया था। जब गुजरात की सरकार अपना राजधर्म भूल कर अपनी ही राज्य के अल्पसंख्यकयों पे कहर बनकर टूटी थी और खून की नदियां चारों दिशा से गुजरात के सड़कों पर बह रही थी। उस वक्त तीस्ता वहां के मजलूम और वंचित लोगों की प्रबल आवाज बनी थी और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए एक एनजीओ भी शुरू किया था।

 जिसका काम था गुजरात दंगा के पीड़ितों को न्याय दिलाना और इस मुद्दे को राष्ट्रीय पटल पर पुरजोर तरीके से रखना। तीस्ता बहुत ही बहादुर महिला हैं,इनके पिता देश के पहले अटॉर्नी जनरल रह चुके हैं। उनके दादा जालियांवाला बाग हत्याकांड के निरीक्षण टीम के सदस्य थे तो ऐसे रसूखदार परिवार से आने वाली तीस्ता अपने बाप-दादा पर गई और हमेशा से मजदूरों और गरीबों का साथ दिया।

 उन्हेंने सत्तामद में डूबी एक-एक अहंकारी सरकारों को आईना दिखाया। आज उनको मुंबई से गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार किया है, क्योंकि गुजरात दंगों में सरकार और वहां के तत्कालीन मुख्यमंत्री जो कि अभी वर्तमान प्रधानमंत्री हैं, उनकी संलिप्तता को उजागर करके उनका चेहरा सभी के सामने दिखाया था।

 विडंबना देखिए दंगा करने वाले आज सत्ता के शीर्ष पर बैठे हुए हैं और दंगा पीड़ितों को राहत पहुंचाने वाली समाजसेविका आज जेल के पीछे हैं। शायद इसी को घोर कलयुग कहते हैं। वर्तमान सरकार की यही दिक्कत है  जो उसके विचारधारा से थोड़ा सा भी इधर उधर चलने की कोशिश करता है, उसके आवाज को दबा दिया जाता है। और उसकी अभिव्यक्ति का गला घोट दिया जाता है। तीस्ता जैसी बहादुर महिला किसी गिरफ्तारी से नहीं डरती लेकिन यह लोकतंत्र पर सवालिया निशान जरूर उठेगा कि किसी भी पत्रकार और सोशल वर्कर को यूंही जेल में भेज देना कहां की न्याय की बात है।

 अगर सच को उजागर करना गुनाह है तो हां तीस्ता गुनाहगार हैं। अगर मजलूम लोगों की सेवा करना गुनाह है तो हां तीस्ता ने गुनाह किया। लेकिन हम सभी जानते हैं समाज के प्रति समर्पण भाव रखना विशाल हृदय को दर्शाता है। लेकिन जो कुंठित मानसिकता से भरे हुए लोग जो कि आज सत्ता के गलियारों में घूम रहे हैं उनको कौन बताए कि क्या सही है या क्या गलत है।

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