मिट्टी बचाओ अभियान सिर्फ हमारी जिम्मेदारी नहीं, जरूरत है।

 अगर आप दुनिया में शांति चाहते हैं, अपने देश में शांति चाहते हैं, अपने समाज में शांति चाहते हैं, अपने घर में शांति चाहते हैं , तो सबका पेट भोजन से भरा होना चाहिए क्योंकि यह बात सबको पता है की बिना भोजन के शरीर के अंदर भी शांति नहीं होती।

मिट्टी बचाओ अभियान सिर्फ हमारी जिम्मेदारी नहीं जरूरत है ।


मिट्टी बचाओ अभियान

समस्त प्राणियों के जीवन का आधार जिसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है, उस मिट्टी को हम इंसानों ने इतना प्रदूषित और पोषक तत्व विहीन कर दिया है, कि आने वाले समय में समस्त जीवित प्राणियों के अस्तित्व पर बहुत बड़ा संकट गहराने वाला है। अगर समय रहते इस समस्या का कोई सार्थक समाधान ना निकाला गया तो भविष्य में कृषि के लिए उपयुक्त मिट्टी के अभाव में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जैसे भोजन संकट, पौष्टिक आहार का अभाव।

इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए योग गुरु और विचारक सद्गुरु जी महाराज ने मिट्टी बचाओ अभियान की शुरुआत की है, जिसके तहत उन्होंने वैश्विक स्तर पर जागरूकता फैलाने के लिए 100 दिनों की दोपहिया वाहन से यात्रा करते हुए उन्होंने बहुत सारे छोटे-बड़े देशों में जागरूकता अभियान चलाया । वहां के राजनीतिज्ञ, पर्यावरण विशेषज्ञों, मिट्टी के जानकार और अनेक गणमान्य लोगों के साथ कार्यक्रम करने के बाद उनका कारवां भारत पहुंच चुका है ।

दुनिया की अनेक वैश्विक संस्थाओं जैसे संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन, विश्व स्वास्थ्य संगठन इन सभी वैश्विक संस्थाओं ने ' मिट्टी बचाओ अभियान ' लिए दुनिया भर के देशों को प्रेरित किया है, और उन्हें इसके लिए अपने -अपने देशों में नियम और कानून बनाने के लिए कहा है, ताकि आने वाले वर्षों में होने वाले खाद्य पदार्थों की कमी और इससे भी  बड़ी समस्याओं का समाधान समय रहते किया जा सके ।

मिट्टी प्रदुषण का दुष्परिणाम

अनेक पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि 2045 तक धरती पर 40% कम खाद्य पदार्थों का उत्पादन हमारे कृषि योग्य मिट्टी द्वारा किया जाएगा और इसका सबसे बड़ा कारण है मिट्टी की खराब गुणवत्ता उनमें जैविक तत्व की भारी कमी ।

वैश्विक जनसंख्या को देखते हुए हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि अगर हमारे पास आज के मुकाबले 40% कम खाद्य पदार्थ होगें तो स्थिति कितनी भयावह हो सकती है । बढ़ती जनसंख्या और घटते खाद्य पदार्थ एक भयानक वैश्विक महामारी ला सकती है, जिसके सामने द्वितीय विश्व युद्ध में मौत के आंकड़े भी काफी छोटा लगने लगेेंगे , क्योंकि यह अनुमान लगाया जा रहा है कि पूरी दुनिया में भोजन की कमी के कारण लगभग 1.5 अरब लोग मौत के आगोश में चले जाएंगे । इसके साथ-साथ हमें मौसम परिवर्तन, भोजन की कमी , पोषक तत्वों की कमी, पानी की कमी , पानी की गुणवत्ता में कमी जैसे अनेकों जानलेवा चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है ।

जो भी भोजन हम आज ग्रहण करते हैं उसका 95% उत्पादन मिट्टी के द्वारा किया जाता है, और 95% एंटीबायोटिक मिट्टी से प्राप्त होता है । मिट्टी को स्वस्थ रखने में सबसे उपयोगी माने जाते हैं उसी में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीव जिसे हम रासायनिक उर्वरक द्वारा बहुत ही तेजी से खत्म कर रहे हैं । हमें याद रखना होगा की मिट्टी के 12 से 15 इंच गहराई तक सारे खाद्य पदार्थों के पौधे होते हैं, जिसके ऊपर 87% जीवित प्राणियों का जीवन निर्भर करता है और आधुनिक खेती में अक्सर ऐसा होता है कि मिट्टी की ऊपरी सतह को बड़े-बड़े कृषि के उपकरण से उसे पूरी तरह रौंद दिया जाता हैं और उस में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों को जो हमारी मिट्टी के लिए गए सबसे जरूरी हैं उन्हें खुले आसमान में रहने के लिए मजबूर कर दिया जाता है, तो यह ऐसा ही है जैसे किसी इंसान का खाल उधेड़ कर शरीर को धूप में रख दिया जाए तो आप अनुमान लगा सकते हैं कि हम मिट्टी के साथ कितना अन्याय कर रहे हैं । 

मिट्टी में जैविक तत्व की मात्रा कम से कम 6% और इससे से भी कम यदि कहा जाए तो 3% तो होना ही चाहिए परंतु दुर्भाग्य की बात यह है कि भारत के 62% मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा मात्र 0.5% ही रह गई है । केवल भारत में ही नहीं दुनिया के अन्य क्षेत्रों में मिट्टी का इससे भी बुरा हाल है और देखा जाए तो यूरोप में जैविक तत्व की मात्रा 1% से भी कम है और अमेरिका के 50% मिट्टी पूरी तरह से जैविक तत्वों से विहीन हो चुकी है ।

अगर हम रेत में प्रचुर मात्रा में जैविक तत्व को मिला दे तो वह एक स्वस्थ मिट्टी बन जाती है , और अगर स्वस्थ् मिट्टी से जैविक तत्वों को निकाल लिया जाए तो वह रेत बन जाती है इसे ही कहते हैं धरती का मरुस्थलीकरण करना जो आज बड़ी तेजी से धरती को अपने आगोश में ले रहा है । समय के हर क्षण के साथ दुनिया में एक एकड़ मिट्टी रेत में बदलती जा रही है और आने वाले 40 से 50 सालों में इसका परिणाम समस्त जीवित प्राणियों को अनेक मुश्किलों और चुनौतियों के रूप में सामना करना पड़ सकता है । जिसका परिणाम यह होगा कि अनेक देशों में गृहयुद्ध और अनेक देश आपस में मिट्टी के लिए लड़ते नजर आएंगे । 

प्राकृति के द्वारा मिट्टी के रूप में धरती को दिए गए अमूल्य धन को सबसे ज्यादा हम इंसानों द्वारा नजर अंदाज किया गया है । जिसका परिणाम हम आज से ही देख सकते हैं क्योंकि दुनिया में हर मिनट 16 से 17 लोग भोजन की कमी के कारण, गरीबी के कारण मौत की आगोश में समाते जा रहे हैं । और अगर हम समय रहते इस स्थिति को नहीं संभाल पाते हैं तो इसका परिणाम आने वाले 40 से 50 सालों में इतनी भयावह हो सकती है कि हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं ।

इसीलिए मिट्टी बचाओ अभियान  सिर्फ हमारी जिम्मेदारी नहीं, यह हमारी जरूरत है कि हम आज जो इस मिट्टी से ले रहे हैं उसे हम अपने आने वाली पीढ़ियों के लिए सही स्थिति और स्वस्थ रूप में प्रदान करें, जिससे उनके जीवन में वह कष्ट ना हो । ऐसा ना हो की वो भोजन तो खाए लेकिन उसमें कोई पोशक तत्व ना हो, पानी तो पीएं लेकिन उसमें कोई खनिज पदार्थ ना हो। और इसलिए आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ और बेहतर जिंदगी देने के लिए हमें यह जिम्मेदारी लेनी होगी कि हम रासायनिक उर्वरक के स्थान पर धीरे धीरे जैविक उर्वरक का इस्तेमाल करना शुरू कर दे और मिट्टी के लिए उपयोगी सूक्ष्म जीवों का कम से कम नुकसान करें ताकि हमारी मिट्टी हमारा जीवन हमारी आने वाली पीढ़ियां सभी स्वस्थ रहें |

इस तरह मिट्टी बचाओ आंदोलन के इस वैश्विक अभियान में अपना योगदान जरूर दें और अपने आसपास के किसानों और मिट्टी से जुड़े लोगों को मिट्टी को स्वस्थ रखने के लिए प्रेरित अवश्य करें और इस अभियान के बारे में जानकारी अवश्य दें । क्योंकि अगर आप दुनिया में शांति चाहते हैं, अपने देश में शांति चाहते हैं, अपने समाज में शांति चाहते हैं, अपने घर में शांति चाहते हैं , तो सबका पेट भोजन से भरा होना चाहिए क्योंकि यह बात सबको पता है की बिना भोजन के शरीर के अंदर भी शांति नहीं होती ।


                 मिट्टी बचाओ अभियान


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